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मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन आजीविका के स्थायी अवसर

समावेशी विकास की ओर बढ़ते मध्यप्रदेश का विकास तभी संभव है जब ग्रामीण भारत समृद्ध हो। अत: ग्रामीण गरीब परिवारों को स्व-सहायता समूहों के रूप में संगठित कर आजीविका के स्थाई अवसर उपलब्ध कराने के लिये म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की स्थापना की गयी। मिशन का उद्देय आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिचित करना है। मिशन  का लक्ष्य है गरीब परिवारों को उपयोगी स्व-रोजगार तथा कौशल आधारित आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और, निर्धनता कम करना और मजबूत बुनियादी संस्थाओं के माध्यम से गरीबों की जीविका को स्थायी आधार पर बेहतर बनाना। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के रूप में पुनर्गठित  कर संपूर्ण देश में मिशन मोड के रूप में कार्यान्वित किया गया। एनआरएलएम में विभिन्न स्तरों पर समर्पित सहायता, संरचनाओं तथा संगठनों के माध्यम से सभी ग्रामीण परिवारों तक पहुंच सुनिचित करने, उनकी क्षमता में वृद्धि करने, वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने, स्व-प्रबंधित आत्मनिर्भर संगठनों का गठन, रोजगार से जोड़ने, लाभकारी स्व-रोजगार और उद्यमों के माध्यम से गरीबी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

माप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन केन्द्र प्रायोजित योजना है जिसका क्रियान्वयन राज्यों को अपनी परिस्थितियों और रणनीति के अनुसार करना है। कार्यक्रम का वित्तपोषण केन्द्र और राज्यों के बीच 75 तथा 25 प्रतिशत की राशि के आधार पर किया जा रहा है। एनआरएलएम ने देश में 600 जिलों, 6000 ब्लॉकों, 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6.0 लाख गांवों में 7 करोड़ बीपीएल परिवारों को उनके स्वत: प्रबंधित एस.एच.जी. तथा उनके परिसंघों और आजीविका क्रियाकलापों में सहायता देकर उन्हें एकजुट करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुरू में, एनआरएलएम के तहत प्रत्येक ग्रामीण निर्धन परिवार से कम से कम एक महिला सदस्य को समयबद्ध रूप से स्व-सहायता समूह में शामिल किया जा रहा है। बाद में महिलाओं को, समूहों के परिसंघ, उनके बड़े संगठन और किसान संघों, दुग्ध उत्पादक समितियों, सहकारिताओं, बुनकर परिसंघों आदि के रूप में संगठित किया जायेगा। और फिर सभी गरीब और अतिगरीब परिवारों को शत-प्रतिशत शामिल करते हुए यह ध्यान रखा जायेगा कि 50 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति-जनजाति, 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक तथा 3 प्रतिशत विकलांग लाभार्थी अवय हों।

जन संस्थाओं को बढ़ाना

गरीबों के विचारों पर ध्यान देने और उन्हें संसाधन उपलब्ध कराने तथा बाहरी एजेंसियों पर उनकी निर्भरता कम करने के लिये समुदाय आधारित समूह-संगठनों के गठन तथा मजबूती के प्रयास किये जा रहे हैं जिसमें स्व-सहायता समूह और स्व-सहायता समूहों के ग्रामस्तरीय परिसंघों को बनाकर उनको मजबूती प्रदान की जा रही है। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों, शक्षिण-प्राक्षिण तथा क्षमता निर्माण से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग से इन संस्थाओं की मजबूती एवं उनके बेहतर परिणामों के प्रयास किये जायेंगे।

आजीविका मिशन के प्रमुख आधार

 गरीबों के लिये विद्यमान आजीविका विकल्पों में वृद्धि करना।

 बाहरी क्षेत्र में रोजगार के अनुसार उनका कौशल विकास करना।

 स्व-रोजगार तथा उद्यमाीलता को प्रोत्साहित करना।

लक्षित वर्ग

 महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अधिक उपेक्षित वर्ग, खासकर उपेक्षित जनजातीय समूहों, एकल महिला और महिला प्रमुख परिवारों, नि:शक्त, भूमिहीन, पलायन करने वाले श्रमिक और अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों पर विोष ध्यान दिया जायेगा।

प्राक्षिण, क्षमता निर्माण तथा कौशल विकास 

सभी स्तरों तथा सभी पक्षों के लिये क्षमता निर्माण के प्रयास किये जायेंगे। जैसे -  संस्थाओं का प्रबंधन, बाजार से संबद्धता, आजीविका प्रबंधन, ऋण की उपलब्धता, ऋण उपभोग की क्षमता निर्माण तथा ऋण साख बढ़ाना, बेहतर आय अर्जन गतिविधियों का संचालन, स्व-सहायता समूहों की मजबूती, परिसंघों का निर्माण तथा उनकी मजबूती, बैंकों से समन्वय एवं गतिविधि क्रियान्वयन, गरीबों को प्रभावित करने वाली सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी और उनसे लाभ प्राप्त करना, त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था से समन्वय एवं सहयोग तथा इनके अलावा सभी उपयोगी एवं आवयक विषयों पर प्राक्षिण एवं क्षमतावर्धन का कार्य किया जायेगा।

आजीविका

मिशन के अंतर्गत मुख्य ध्यान कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में गरीबों की आजीविका संबंधी मौजूदा कार्य को स्थाई बनाना तथा बढ़ावा देना है। मिशन प्रत्येक परिवार की आजीविका के संपूर्ण पहलू की जांच करता है व्यक्तिगत, परिवार स्तर पर अथवा सामूहिक रूप में तथा दोनों स्तरों पर कार्य के लिये सहायता उपलब्ध करता है।

समूहों को आय के स्त्रोत और रोजगार, व्यय से बचाव जोखिम प्रबंधन, ज्ञान कौशल, परिसंपत्तियां और अन्य संसाधन संवर्द्धन के बारे में जानकारी दी जा रही है। उनका क्षमतावर्द्धन किया जाता है ताकि वे सामूहिक खरीद, समूह मूल्य संवर्द्धन और अपने उत्पाद की सामूहिक बिक्री कर सकें जिससे ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। मिशन विशष्टि आजीविका, संस्थाओं को बढ़ावा देने के लिये भी सहायता प्रदान करता है। जैसे- खेती, पाुधन, वानिकी, मत्स्य क्षेत्र, गैर-कृषि और सेवा क्षेत्र।

सामुदायिक स्त्रोत व्यक्ति (सी.आर.पी.)

समुदाय के बीच से ही समूह अवधारणा के प्रचार-प्रसार, समूह अभिलेख संधारण बैंक संयोजन, सामाजिक जन जागृति, समूह तथा परिसंघों की मजबूती, समूह बैठकों का आयोजन, संचालन एवं क्षमता निर्माण, समूहों की आय अर्जन गतिविधियों में सहयोग, आदि कार्यों के लिये सामुदायिक स्त्रोत व्यक्तियों का चिन्हांकन एवं क्षमतावर्द्धन किया जाता है।

कौशल विकास तथा प्लेसमेंट

मिशन ग्रामीण बीपीएल युवाओं के लिये कौशल की कमी को तथा शुरुआती बाधाओं को दूर करने तथा अर्थव्यवस्था के बढ़ते हुए क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ऊँची मजदूरी, रोजगार की सुविधा देने के लिए प्रयासरत है।

ग्रामीण स्व-रोजगार प्राक्षिण संस्थान (आरएसईटीआई)

मिशन तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को देश के सभी जिलों में ग्रामीण

स्व-रोजगार प्राक्षिण संस्थान (आरएसईटीआई) स्थापित करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। अपने क्षेत्र के युवक-युवतियों के नाम इन केन्द्रों तक पहुंचाये जाते हैं। प्राक्षिण प्राप्त करने के बाद बैंक उन्हें स्वरोजगार के लिये ऋण उपलब्ध कराती है। इन केन्द्रों पर युवाओं को प्राक्षिण दिलाने के उपरांत स्वरोजगार स्थापित करने के लिये बैंकों से जोड़ा और औद्योगिक संस्थाओं में काम दिलाने के लिये प्रयास किया है।

ग्रामीण गरीबों का पंचायती राज, मानव संसाधन विकास, कृषि, पाुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वस्त्र, महिला एवं बाल विकास, वित्तीय सेवा, पर्यटन इत्यादि मंत्रालयों के कार्यक्रमों के साथ तालमेल किया जा रहा है। इसके अलावा मिशन के अंतर्गत अन्य परियोजनाओं, कार्यक्रमों, विभागों द्वारा गरीबों को संगठित किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत आम आदमी बीमा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना आदि कार्यक्रमों के साथ तालमेल के जरिए जीवन, परिसंपत्तियों और स्वास्थ्य के नुकसान की स्थिति में ग्रामीण गरीबों की सर्वव्यापी सुरक्षा सुनिचित करने के लिये पहल की जा रही है।

 

सोया आत्मविʉशास जागा शहडोल - संकुल पंचगांव, ग्राम अंतरा

ग्राम निवासरत परिवारों के बेरोजगार युवक युवतियों को म.प्र. शासन की रोजगारोन्मुखी नीति के तहत रोजगार से जोड़ने का कार्य भी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है। इसी उद्देय से 31 जनवरी 2014 को मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन संकुल पंचगांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम अंतरा के कंकाली देवी मंदिर परिसर में एक संकुलस्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया गया। इस रोजगार मेले में रुक्मणी बैगा ने "स्पेण्टेक्स इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. पीथमपुर-धार" नामक कंपनी में साक्षात्कार दिया।  साक्षात्कार उपरांत रुक्मणी बैगा का चयन "स्पेण्टेक्स इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. पीथमपुर-धार" में ट्रेनी आपरेटर के पद पर किया गया। वर्तमान में रुक्मणी बैगा "स्पेण्टेक्स इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. पीथमपुर-धार" में ट्रेनी आपरेटर के पद पर कार्य कर रही है। वर्तमान समय में रुक्मणी को 4800 रुपये मासिक वेतन प्राप्त हो रहा है और यदि वह ओवर टाइम भी करती है तब उसे 24 रुपये प्रति घण्टे की दर से अलग से भुगतान प्राप्त होता है। कंपनी अपने कर्मचारियों के लिये आवास एवं बिजली उपयोग की व्यवस्था नि:शुल्क प्रदाय करती है तथा भोजन के लिये कंपनी की अपनी कैंटीन है जहां कर्मचारी 13 रुपये में एक वक्त का भोजन प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा कंपनी अपने कर्मचारियों को ई.पी.एफ. की सुविधा दे रही है। चयन उपरांत रुक्मणी बैगा अपने घर से इतनी दूर धार जिले के पीथमपुर जाने में हिचकिचा रही थी तब मिशनकर्मियों ने रुक्मणी के परिवार वालों से मुलाकात की तथा उन्हें विʉशास दिलाया कि उनकी बेटी पीथमपुर-धार में रहकर सकुशल तथा सुरक्षित कार्य करेगी। इसके अलावा रुक्मणी के परिवार के लोगों को यह भी बताया गया कि रुक्मणी को पीथमपुर तक पहुंचाने मिशन के एक कर्मचारी भी जायेंगे। इन बातों से रुक्मणी का आत्मविʉशास जागा एवं उसके मन का भय समाप्त हुआ और वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिये पीथमपुर-धार जाने को तैयार हो गयी। रुक्मणी ने 12वीं तक शक्षिश प्राप्त की है उसके माता-पिता खेती एवं मजदूरी करने का कार्य करते हैं। रोजगार मेले में चयनित होने से पूर्व रुक्मणी स्वयं भी खेतों में मजदूरी करने का कार्य करती थी और उसकी तथा उसके परिवार की आजीविका का स्त्रोत मजदूरी करना था।

आज रुक्मणी का आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ ही सामाजिक स्तर भी और बेहतर हुआ है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे में बताते हुए रुक्मणी भावुक होकर बतलाती है कि "मैं यह सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि एक दिन मैं अपने घर से इतनी दूर जाकर नौकरी कर पाऊंगी तथा अपने और अपने परिवार का जीवन बेहतर कर सकूंगी।"

उपलब्धि

  •  लगभग 4 लाख परिवारों को 36 हजार स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया।

  •  स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों के लिए बैंक शाखाओं से 305 करोड़ रुपये का ऋण दिलाया गया।

  •  ग्रामीण क्षेत्र के निर्धन परिवारों के लगभग 70 हजार बेरोजगार युवाओं को रोज़गार मेलों के माध्यम से जॉब ऑफर उपलब्ध कराए गये। लगभग 1 लाख युवक-युवतियों को रोज़गार तथा स्वरोज़गार से जोड़ा गया है।

  •  43 हजार से अधिक कृषकों को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से जोड़ा गया।

  •  सब्जियों के विक्रय के लिए समूहों द्वारा 53 आजीविका फ्रैश संचालित की जा रही हैं।

  •  1,685 ग्राम संगठन बनाए गए।

  •  5,500 स्व-सहायता समूहों को 25 करोड़ रुपये की राशि आजीविका आदि गतिविधियों के लिए सामुदायिक निवेश तथा वंचित वर्ग के लिए निवेश के रूप में उपलब्ध करायी गयी।

 

औजारों से तैयार की नियमित आय

खूब से खूब, बेहतर से बेहतर तलाश कर, नदी जो मिल जाये, तो समुन्दर तलाश कर। कुछ इसी तरह का जज्बा लिये ग्राम तुईयापानी (फगनीटोला) के आशीष उइके ने अपनी गरीबी को दूर करने हेतु गांव से निकलकर न सिर्फ प्लम्बर का प्राक्षिण प्राप्त किया, अपितु "होम सिकनेस" से पीछा छुड़ाते हुए सिंगरौली स्थित कम्पनी में नौकरी हासिल की। म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मण्डला अंतर्गत परियोजना सहायता दल पिण्डरई के ग्राम तुईयापानी (फगनीटोला) निवासी श्री विसराम सिंह उइके के छोटे पुत्र श्री आशीष उइके ने परिवार में मौजूद गरीबी से जूझते हुए अपनी स्नातक की पढ़ाई मण्डला कॉलेज से पूरी करते हुए पढ़ाई के बीच खाली समय में कृषि कार्य में अपने पिता का सहयोग भी किया। संकुल पिण्डरई के समन्वयक श्री रविन्द्र डेहरिया ने बताया, कि "ग्राम में युवाओं के सर्वे के दौरान इस युवक से मुलाकात हुई। युवक में गरीबी से बाहर आने का गजब का जज्बा दिखा। उसके जज्बे को देखकर उसका नाम प्लम्बर के प्राक्षिण के लिये दर्ज किया गया। श्री डेहरिया आगे बताते हैं, कि सितम्बर 2013 में जिला कार्यालय से प्लम्बर के प्राक्षिण के लिये नाम मांगे जाने पर आशीष का नाम जिला कार्यालय भेजा गया तथा 30 सितम्बर 2013 को कौशल उन्नयन एवं प्लेसमेंट के माध्यम से 60 दिनों के प्राक्षिण के लिये नवानगर सिंगरौली स्थित दैनिक भास्कर फाउण्डेशन में भेजा गया। 

लगभग दो माह पचात प्राक्षिण प्राप्त करके लौटे आशीष ने संकुल कार्यालय आकर वहां के अच्छे वातावरण तथा वहीं रहकर कार्य करने की इच्छा जाहिर की। कहा जाता है, कि "मन में लगन जागती है तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं।" इसी बात को चरितार्थ करते हुए आशीष ने बताया, कि प्राक्षिण के पचात लगभग 25 दिनों के बाद मेसर्स ए.के. इंटरप्राइजेज, सिंगरौली" से उसके पास फोन आया, कि यदि आप यहां पर कार्य करने के इच्छुक हो, तो हमारी कम्पनी में ज्वाइन कर लो। जहां उसे 6 से 7 हजार रुपये मासिक प्राप्त होंगे, रहने व खाने की व्यवस्था कम्पनी खर्चे पर उपलब्ध करायेगी। आशीष के लिये ये फोन जैसे किसी वरदान से कम नहीं था। उसने संकुलकर्मियों और अपने परिवार में सलाह माविरा किया तो सभी ने उसका हौसला बढ़ाया। अपने हुनर व हौसले के सहारे आशीष ने कम्पनी ज्वाईन कर ली।

आशीष से उसके मोबाइल नंबर 8269798030 पर बात करने पर उसने बहुत ही खुश होकर बताया, कि आजीविका मिशन की बदौलत ही वह आज अपने पैरों पर खड़ा हो सका है। उसको वहां पर प्राक्षिण शक्षिश विभाग का कार्य सौंपा गया है, जिसे वह पूरी लगन और उत्साह से कर रहा है।

 

आर्थिक साक्तीकरण के सफल प्रयास

मध्यप्रदेश के रीवा और रायसेन जिले में ऐसी महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण का प्राक्षिण देकर उन्हें आथिर्क रूप से सबल बनाने की कोशाोंि में सार्थक सफलता मिली है। रीवा जिले में गरीब ग्रामीणों के जीविकोपार्जन के लिए एक ऐसी गतिविधि की आवयकता थी, जिससे ग्रामीणों का पलायन रोका जा सके। जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना द्वारा इस दिशा में सफल प्रयास किये गये हैं। यह कोशाि की गई कि उन्हें ऐसा स्थायी रोजगार आसानी से उपलब्ध हो, जिससे पूरे वर्ष उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो और सुनिचित आजीविका मिल सके। इस परिप्रेक्ष्य में परियोजना ने ग्रामीण अंचलों में महिला स्व-सहायता समूहों की मदद से अगरबत्ती उद्योग लगाने की पहल की है।

रीवा जिला म.प्र. शासन की परियोजना डीपीआईपी अंतर्गत जिलों में से एक है। जिले के 02 विकासखण्ड रीवा एवं रायपुर कर्चुलियान के 02 ग्राम खीरा एवं जोरी की स्व-सहायता समूह की महिला सदस्यों से अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़ने की प्रेरणा दी गई।

अक्षर अगरबत्ती स्वायत्त सहकारी समिति : अगरबत्ती निर्माण कार्य की शुरुआत परियोजना द्वारा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को हस्त निमिर्त अगरबत्ती निर्माण के प्राक्षिण के साथ हुई। स्व-सहायता समूहों की लगभग 180 महिलाओं को यह प्राक्षिण एक निजी संस्था द्वारा प्रदाय किया गया जो महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण के प्राक्षिण देने के साथ ही उनके द्वारा तैयार अगरबत्ती का क्रय करती हैं इससे महिलाओं को अगरबत्ती निर्माण में रुचि उत्पन्न हुई। स्व-सहायता समूहों की लगभग 180 महिलाओं द्वारा अक्षर अगरबत्ती स्वायत्त सहकारी समिति का गठन किया गया। प्रारंभ में जोरी एवं खीरा केन्द्र में कच्ची अगरबत्ती का निर्माण किया जाता था जो विभिन्न व्यापारियों को विक्रय किया जा रहा था। शुरुआती दौर में कच्ची अगरबत्ती निर्माण से प्रत्येक महिला सदस्य को रुपये 3500 मासिक आय प्राप्त होने लगी। शुरुआती सफलता को देखते हुये समिति की महिलाओं ने निर्णय लिया कि कच्ची अगरबत्ती के साथ-साथ सुगंधित अगरबत्ती का निर्माण कर सीधे ही नजदीकी बाजार में विक्रय करेंगी। इस पहल की विधिवत शुरुआत जोरी ग्राम से की गयी, महिलाओं द्वारा निमिर्त एवं विपणन के लिये तैयार अगरबत्ती को "वातजातम् नमामि" ब्राण्ड के नाम से उतारा गया इस प्रयास के फलस्वरूप जहां समिति को रुपये 20 हजार मासिक अतिरिक्त आय हुयी वहीं दस महिलाओं को सेंटिंग एवं पैकेजिंग में रोजगार प्राप्त हुआ। इस ब्राण्ड का विमोचन अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती अरुणा शर्मा के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

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