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आजीविका से समृद्ध होता समाज

ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करने तथा ग्रामीणों के मज़बूत स्व-सहायता समूह, ग्राम संगठन, संकुल स्तरीय संगठन गठित करने के लिए 15 जिलों के 53 जनपदों में "जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना" तथा सभी जिलों में "ग्रामीण आजीविका मिशन" का क्रियान्वयन किया जा रहा है। वर्ष 2013-14 में प्रदेश में 448 रोज़गार मेले आयोजित कर 83540 युवाओं को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराये गये।

मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास  वभाग के अंतर्गत स्व-सहायता समूह संवर्धन नीति और रोज़गारोन्मुखी प्राक्षिण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए "राज्य आजीविका फोरम" का गठन किया गया है जो कि एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है। स्व-सहायता समूह संवर्धन नीति के तहत समूहों तथा उनके संगठनों के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाता है। रोज़गारोन्मुखी प्राक्षिण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्राक्षिण दिलाकर रोज़गार उपलब्ध कराने के अलावा रोज़गार के इच्छुक युवाओं को कार्य के अवसर पूरे राज्य में समय-समय पर रोज़गार मेले आयोजित कर कार्य के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्ष 2013-14 में प्रदेश में 448 रोज़गार मेले आयोजित कर 83540 युवाओं को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए गये।

 विभाग द्वारा वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करने तथा ग्रामीणों के मज़बूत स्व-सहायता समूह, ग्राम संगठन, संकुल स्तरीय संगठन गठित करने के लिए 15 जिलों के 53 जनपदों में "जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना" तथा सभी जिलों में "ग्रामीण आजीविका मिशन" का क्रियान्वयन किया जा रहा है। शहडोल, अनूपपुर, मण्डला, डिण्डौरी, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, योपुर एवं बालाघाट (दो विकास खण्ड) में सघन रूप से मिशन का कार्य किया जा रहा है।

"जिला गरीबी उनमूलन परियोजना" और "ग्रामीण आजीविका मिशन" के अंतर्गत गरीब एवं अति गरीब परिवारों की एक-एक महिला को सम्मिलित कर 10 से 20 महिलाओं के स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है जिनके द्वारा नियमित रूप से पंचसूत्र का पालन करने पर उन्हें रिवॉल्विंग फण्ड तथा आजीविका कार्यों में निवेश इस राशि उपलब्ध कराई जाती है। इन समूहों द्वारा अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने की दृष्टि से सूक्ष्म निवेश योजनाएँ बनाकर बैंकों में प्रस्तुत की जाती हैं जिसके आधार पर उन्हें ऋण उपलब्ध होता है तथा समूह के सदस्य उपलब्ध ऋण को आवयकतानुसार आपस में बांट कर अपनी गतिविधियों को सुदृढ़ करते हैं तथा निर्धारित समय पर कितों की राशि ब्याज सहित वापस बैंकों में जमा कर नये ऋण के प्रकरण बैंकों में प्रस्तुत करते हैं।

ग्राम स्तर पर गठित स्व-सहायता समूहों का ग्राम स्तर पर संगठन बनाया जाता है तथा इस संगठन में ग्राम स्तरीय उप समितियाँ अलग-अलग विषयों में गठित की जा रही हैं। ग्राम संगठन की नियमित बैठकें होती हैं जिनमें विभिन्न विषयों पर एजेन्डा अनुसार चर्चाएँ होती हैं तथा कार्यवाही विवरण निर्धारित पंजी में लिखा जाता है। ग्राम संगठन में विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक विषयों पर चर्चा होती है तथा समूहों के साक्तीकरण पर ध्यान दिया जाता है।

"जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना" एवं "मिशन" के अंतर्गत ग्राम स्तरीय स्त्रोत व्यक्तियों का चयन कर उन्हें साक्त बनाने की कार्रवाई की जा रही है ताकि गरीबी उन्मूलन में वे सार्थक और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इनके द्वारा नये ग्रामों में समूह बनाने के लिये महिलाओं को प्रेरित करना, उन्हें पंचसूत्र के महत्व को समझाकर इनका पालन कराना एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से अवगत कराने का कार्य किया जा रहा है। इन समूह स्त्रोत व्यक्तियों को लगातार प्राक्षिित किया जाता है तथा उन्हें समय-समय पर राज्य के भीतर तथा राज्य के बाहर भी विभिन्न प्रकार के कार्यों एवं प्रक्रियाओं की समझ विकसित करने के लिए भेजा जा रहा है।

ऐसे ग्रामीण बेरोजगार युवा जो रोज़गार प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें रोज़गार के अवसर लगातार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिये ग्रामीण युवाओं को निम्न तीन श्रेणियों में बांटा जाता है :-

  • जिन्हें प्राक्षिित कर विभिन्न प्रतिष्ठानों में (प्रदेश के भीतर एवं प्रदेश के बाहर) कार्य के अवसर उपलब्ध कराये जाते हैं।

  • जिन्हें रोज़गार मेलों के माध्यम से बिना प्राक्षिण दिलाए विभिन्न कंपनियों, प्रतिष्ठानों में रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए जाने हैं।

  • जो युवा अपने गांव अथवा क्षेत्र में स्वयं का रोज़गार स्थापित करना चाहते हैं उन्हें जिलों में स्थापित आरसेटी के माध्यम से उनकी रुचि के विषय में प्राक्षिित कर स्वयं का रोज़गार स्थापित करने में सहायता की जाती है। ऐसे व्यक्तियों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने में भी आरसेटी संस्थानों, मिशन एवं जिला तथा जनपद पंचायतों द्वारा सहायता दी जाती है।

उपरोक्त तीनों व्यवस्थाओं का लाभ अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं द्वारा अपनी रुचि अनुसार उठाना चाहिये। ऐसे अनेक उदाहरण हमारे सामने हैं जहाँ ग्रामीण युवाओं ने इसका लाभ उठाकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर अपने परिवार की आजीविका को सुदृढ़ कर सम्मानपूर्वक जिन्दगी बिताना प्रारंभ कर दी है। ऐसे व्यक्तियों का स्वयं के जीवन में बदलाव तो आया ही है इसके साथ ही उनके आने वाली पीढ़ी भी मुख्य धारा से जुड़कर प्रदेश और देश के विकास में अपना योगदान देगी।

म.प्र. के 25 जिलों के उन ग्रामों में जहाँ "जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना" एवं "ग्रामीण आजीविका मिशन" द्वारा सघन रूप से दिखाई दे रहा है। साक्त महिला संगठनों के अलावा आजीविका सुदृढ़ीकरण के उदाहरण देखे जा सकते हैं। कृषि, पाुपालन, उद्यानिकी, गैर- परम्परागत ऊर्जा के स्त्रोतों का उपयोग, सूक्ष्म उद्यमिता विकास, रोज़गार के अवसर के क्षेत्रों में इन ग्रामों में अनुकरणीय कार्य हो रहे हैं तथा महिला साक्तीकरण का जो कार्य हो रहा है वह उल्लेखनीय है। अनेक महिलाएँ एवं पुरुष जो काम की तलाश में बाहर जाते थे वे अब स्वयं अपनी आजीविका सुदृढ़ कर सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। महिलाएं अपने विकास का कार्य अपने संगठनों के माध्यम से बखूबी कर रही हैं। इन ग्रामों में ग्राम सभाओं में भी सार्थक चर्चाएं होती हैं तथा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति ग्रामीण जागरूक हो रहे हैं।

इन ग्रामों में महिलाओं के संगठनों द्वारा ग्राम के बच्चों को स्कूल भेजने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं, शौचालयों के निर्माण एवं उपयोग हेतु आवयक कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं द्वारा अपनी आजीविका सुदृढ़ करने के अलावा अपने परिवारों की शक्षिश और स्वास्थ्य संबंधी आवयकताओं की पूर्ति की जा रही है, समूहों से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के आत्मविवास में वृद्धि हुई और ग्रामों में एकता तथा सामाजिक सौहार्द्र का वातावरण निर्मित हुआ है, अनेक महिलाओं द्वारा गिरवी में रखे अपने वस्त्र, आभूषण, जमीन और अन्य मूल्यवान वस्तुएं वापस प्राप्त कर ली हैं तथा अपनी आवयकताओं की पूर्ति समूह निधि तथा बैंक से प्राप्त ऋण से सफलतापूर्वक की जा रही है।

ग्राम पंचायतों से अपेक्षाएँ

  • महिलाओं के संगठनों के विकास में सहयोग।

  • ग्राम सभाओं में ग्रामों के सर्वांगीण विकास के लिए सार्थक चर्चा।

  • अधिक से अधिक निर्धन ग्रामीण महिलाओं को समूह से जुड़ने एवं पंचसूत्र पालन में सहयोग।

  • महिलाओं की मांगों पर त्वरित विचार एवं कार्रवाई।

  • ग्राम संगठनों की बैठकों हेतु स्थल उपलब्ध कराना।

  • ग्रामों के सर्वांगीण विकास के लिए मिशन के कार्यकर्ताओं को सहयोग करना।

  • जिन युवाओं को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, उन्हें रोज़गार स्थल पर जाने के लिये प्रेरित करना।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

वित्तीय प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश की सराहना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

            (NRLM) ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की सराहना की है। देश के विभिन्न राज्य में लेखा प्रणाली में एकरूपता लाने तथा लेखा विवरण तैयार करने में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए एनआरएलएम के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्याशला 10 जून को भोपाल में शुरू हुई। इसमें तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, पचिम बंगाल, उड़ीसा, असम, उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा तथा राजस्थान सहित 15 राज्यों के वित्तीय प्रबंधन अधिकारी भाग ले रहे हैं। वित्तीय प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश द्वारा टेली सॉफ्टवेअर के सफल उपयोग की वजह से कार्याशला के आयोजन का महत्वपूर्ण दायित्व मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपा गया है।

कार्याशला का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई, नई दिल्ली की मुख्य परिचालन अधिकारी (चीफ ऑॅपरेटिंग आफिसर) श्रीमती शांति कुमारी ने विभिन्न राज्यों की लेखा व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी ग्रामीण आजीविका मिशन श्री एल.एम. बेलवाल ने प्रदेश की विोष उपलब्धियों और महत्वपूर्ण नवाचार की जानकारी दी। कार्याशला में विʉश बैंक कन्सलटेंट सुश्री तान्या गुप्ता भी उपस्थित थीं। श्रीमती शांति कुमारी ने कहा कि आय-व्यय और वित्तीय स्थिति की सही जानकारी बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए जरूरी है। सभी राज्यों की मिशन प्रबंधन इकाइयों को टेली सॉफ्टवेअर कङघ्-9 के उपयोग के संबंध में प्राक्षिण प्रदान करने और विभिन्न समस्याओं के समाधान के उद्देय से इस कार्याशला का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश इस सॉफ्टवेअर के उपयोग में अग्रणी राज्य है। रिसोर्स स्टेट के रूप में मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को इस बारे में प्राक्षिित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की सहायक परियोजना प्रबंधक (वित्तीय प्रबंधन) श्रीमती संजू रावत ने सॉफ्टवेअर की मदद से विभिन्न लेखा विवरण तैयार करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया पर वीडियो प्रेजेन्टेशन दिया। उन्होंने बताया कि राज्य मिशन प्रबंधन इकाई के साथ ही 9 जिला मिशन प्रबंधन इकाई और 164 प्राथमिक सहयोग दलों को सॉफ्टवेअर की मदद से लेखा संधारण का प्राक्षिण दिया गया है। इससे प्रदेश में ग्राम से राज्य स्तर तक वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय वित्त प्रबंधन व्यवस्था (सेन्ट्रल फंड मैनेजमेन्ट सिस्टम- सीएफएमएस) के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है।

प्रदेश के धार, रायसेन और भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीएफएमएस का सफल क्रियान्वयन किया जा चुका है। कार्याशला में राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई ने सभी राज्य की विगत दो माह अप्रैल तथा मई 2014 के वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा भी की। कार्याशला का संचालन उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आर.बी. शर्मा ने किया।

ग्रामीण महिलाएँ बदल रही हैं अपने परिवारों की तकदीर

जिला गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रदेश

            के ग्रामीण अंचलों में गठित महिला स्व-सहायता समूहों को आथिर्क और सामाजिक रूप से साक्त बनाया जा रहा है। समूहों के गठन के बाद ग्रामीण महिलाओं ने अपने परिवारों की आथिर्क दाश को बदला है। ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में भी इन समूहों की भूमिका रही है। प्रदेश में अब तक 70 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों से लाखों गरीब ग्रामीण परिवार को जोड़कर उन्हें आथिर्क रूप से साक्त बनाने की कोशोंि जारी हैं।

राजगढ़ जिले के ब्यावरा बाय-पास के पास ग्राम मोई की महिलाओं ने 8 समूहों के जरिये छोटी-छोटी बचत से 81 हजार रुपये जमा कर लिये हैं। इस छोटे से गाँव में 328 परिवार रहते हैं। इन समूहों को डी.पी.आई.पी. द्वारा 11.92 लाख रुपये का कर्ज मुहैया कराया गया। अब तक 18 लाख 71 हजार से अधिक राशि का कर्ज इन समूहों को मिला। महिलाओं ने समूहों से ऋण लेकर भैंस-बकरी पालन और अन्य गतिविधियाँ शुरू कर अपनी स्थिति को बेहतर बनाया है। ये सभी कर्ज को समय पर चुका रही हैं और कर्ज की दूसरी कित लेकर गतिविधियों का विस्तार भी कर रही हैं।

स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्राम सभा में भी भागीदारी करती हैं। इनके प्रयासों से ही गाँव में नल-जल योजना साकार हुई है। महिलाओं ने खुले में शौच की बुराई को मिटाने के लिये अपने घरों में शौचालय बनवाये हैं। इन महिलाओं के चेहरों पर आत्म-विʉशास साफ दिखता है। यह बदलाव आस-पास के कई ग्रामों की महिलाओं के लिये भी प्रेरणादायक सिद्ध हुआ है।

 

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