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पुस्तक चर्चा :

निष्पक्ष चुनाव के लिए है आदर्श आचरण संहिता

विधिक पुस्तकों के जो कुछ प्रचलित स्वरूप हैं उनमें सबसे पहले तो अधिनियम यानी कानून की पुस्तक का नाम आता है। दूसरा स्वरूप होता है नियम-उपनियम पुस्तिकाओं का जो किसी कानून की पुस्तक में उल्लिखित विधिक निर्णयों के क्रियान्वयन में काम आते हैं। तीसरा स्वरूप वो होता है जिसे आचरण संहिता की संज्ञा दी जाती है। यह आचार संहिता किसी विधिसम्मत आयोग, परिषद अथवा न्यास द्वारा या तो लक्ष्य समूह पर अधिरोपित की जाती है अथवा अंगीकृत की जाती है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2013 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रकाशित पुस्तिका - ''आदर्श आचरण संहिता'' इसी श्रेणी में आती है।

आदर्श आचरण संहिता का प्रकाशन भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव में भाग लेने वाले राजनैतिक दलों और अभ्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए किया है। आदर्श आचरण संहिता के पहले बिन्दु के रूप में साधारण आचरण की बात की गई है। इन साधारण आचरण में किसी दल या अभ्यर्थी के लिए वर्जित कार्यों, व्यक्तिगत आलोचना से परहेज, जातीय या साम्प्रदायिक सन्दर्भों से बचाव, भ्रष्टाचरण से बचाव, किसी भी अभ्यर्थी की निजी जिन्दगी में दखल न देने, बिना सहमति के किसी की सम्पत्ति पर झण्डा, बैनर या पोस्टर चस्पा करने तथा परस्पर विरोधी दलों की सभाओं में बाधा उत्पन्न करने से बचने की बात कही गई है। आदर्श आचरण संहिता का दूसरा बिन्दु सभाओं से सम्बध्द है। अनुमत्य स्थान पर पूर्वानुमति से ही सभा का आयोजन करने, निषेधात्मक अथवा प्रतिबन्धात्मक आदेश जहाँ लागू हो वहाँ सभा न करने, बिना अनुमति के सभाओं में लाउडस्पीकर अथवा अन्य किसी सुविधा का उपयोग न करने तथा सभा में किसी व्यवधान की स्थिति में व्यवधान डालने वालों से खुद निपटने के बजाय पुलिस को खबर किये जाने की बात भी कही गई है। इसी कड़ी में जुलूस के आयोजन पर भी कुछ आदर्श आचरण सुझाए गए हैं। यथा जुलूस का समय तथा स्थान तय हो और उस समय तथा स्थान की प्रशासन से अनुमति ली गई हो। जुलूस की स्थानीय पुलिस अधिकारियों को पहले से सूचना हो। जुलूस मार्ग की भी पूर्वानुमति हो तथा जहाँ निषेधात्मक आदेश लागू हो वहाँ से जुलूस को न निकाला जाये। संहिता में यह भी बताया गया है कि जुलूस से सामान्य यातायात में कोई बाधा उपस्थित न हो। जुलूस की व्यवस्था ऐसी की जाये कि सभी जुलूस सड़क की दाईं ओर से ही गुजरें अर्थात जुलूस के बाद भी आधी सड़क खाली रहे तथा जुलूस के संचालक यातायात नियमों का पालन करें। यदि दो जुलूस एक ही सड़क से गुजरने वाले हों तो उनको ऐसा अलग-अलग समय दिया जाये कि उनमें आपस में टकराव न हो। जुलूस में ऐसी वस्तुओं को लेकर कड़े प्रतिबंध हों जो अवांछनीय तत्वों द्वारा विशेष रूप से उत्तेजना के क्षणों में हिंसा के प्रयोजन से दुरुपयोग योग्य हो।

आदर्श आचरण संहिता में सत्तारूढ़ दल से कुछ ज्यादा तटस्थता और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। सत्तारूढ़ दल चाहे वो केन्द्र में हो या संबंधित राज्य या राज्यों में हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह शिकायत करने का मौका न दिया जाये कि उस दल ने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए अपने सरकारी पद का प्रयोग किया है। खासतौर पर मंत्रियों को अपने शासकीय दौरों को निर्वाचन से संबंधित प्रचार कार्य के साथ नहीं जोड़ना चाहिए और निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुए शासकीय मशीनरी अथवा शासकीय कर्मियों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार सरकारी विमानों, गाड़ियों सहित सभी सरकारी वाहनों, मशीनरी और कर्मियों का सत्ताधारी दल के हित को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए।

मतदान दिवस के लिए भी आचरण संहिता में यह स्पष्ट किया गया है कि व्यवस्था ऐसी हो कि मतदान शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से हो और मतदाता बिना किसी परेशानी या बाधा के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें। मतदान दिवस पर राजनैतिक दल अपने प्राधिकृत कार्यकर्ताओं को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें। मतदाताओं को दी जाने वाली पर्चियाँ भी सादे कागज पर हों उन पर अभ्यर्थी अथवा राजनैतिक दल का नाम या प्रतीक चिन्ह न हो। मतदान के दिन और उसके पूर्व के चौबीस घण्टों के दौरान किसी को शराब पेश या वितरित न करें। इसी प्रकार मतदान केन्द्र में मतदाताओं के सिवाय कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए विधिमान्य पास के बिना मतदान केन्द्रों में प्रवेश न करे। आचरण संहिता में प्रेक्षक तथा सत्तारूढ़ राजनैतिक दल के लिए भी कुछ आचरण तय किये हैं। कुल मिलाकर तटस्थ और भयमुक्त निर्वाचन के लिए यह एक उपयोगी आदर्श आचरण संहिता है।

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